सर्दी का मोसम चला गया है और अब गर्मी का मोसम आ गया है, मई और जून के महीने में गर्मी इतनी बढ़ जाती है कि >इंसानों के लिये भी गर्मी सहन करना मुस्कील होता है, ऐसे में बेसहारा बेजुबान पक्षियों का क्या हाल होता
होगा |
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एक पक्षी की दर्द भरी कहानी अब सुनो उनकी ही जुबनीn
हैं इंसानों! आपके पास रहने के लिए ऊंचे -ऊंचे मकान है उनमें
AC, कूलर, पंखा,और फ्रिज लगे हुअ हैं,लेकिन हमारे पास तो पीने के लिये पानी भी नहीं है क्योकि अब तालाब ही सुख गये हैं,और हमारे घर जो पेड़ों थे वो भी इन लालची इंसानों ने काट दिए, ऐसे में हम बेसहारा और लाचार हो गये हैं,इस गर्मी के मोसम में हम दाना और पानी के लिये कहाँ जाये,इस तेज़ गर्मी में प्यास के कारण हमारे कई पक्षी भाइयों की जान चली जाती है,
ऐसे में आप से निवेदन है कि इस गर्मी के मोसम में हमारे लिये दाना-पानी की व्यवस्था करें,
ऐसे करें हमारे लिये पानी की व्यवस्था -
अगर आपके घर के पास कोई पेड़ हो तो उस पर रस्सियों की सहायता से एक चौड़ा बर्तन लटका दीजिए या फिर आपने घर की छत पर एक बर्तन रख दीजिए और उसमें रोज़ सुबह पानी डाल दिया करें हमारे लिये इतना तो आप कर ही सकते हैं,
हमारी दास्ता सुनने के लिये धन्यवाद!
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