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एक जमाना था,
मानव पोस्टमेन का दिवाना था।
जब से आया है मोबाईल फोन,
पोस्टमेन को पूछता है कौन॥

आज समय के साथ सब कुछ बदल रहा है। प्राचिन काल मेँ कबुतर पोस्टमेन का कार्य करता था। फिर समय के साथ पोस्टमेन संदेश भेजने का काम करने लगा और आज लोग डाक भेजने लिए ईलेक्ट्रोनिक मेल का उपयोग किया करते है।
ई-मेल सुविधा के आने के बाद कुछ लोगो का मानना हैँ कि अब सामान्य मेल अनोपयोगी हो गया हैँ। और धीरे-धीरे यह सम्पूर्ण रुप से उपयोग हीन हो जायेगी। लेकिन मेरा मानना है कि पोस्टमेन का जितना महत्व पहले था आने वाले समय मेँ भी उतना ही रहगा , जिस प्रकार हवाईजाज के आने से रेलगाङी का महत्व कम नहीँ हुआ।
ई-मेल एक तकनिकी सेवा हैँ
और तकनिकी का कोई विश्वास नहीँ कब धोखा दे जाये।
अगर मान लिया जाये कि हमारे शहर मेँ कोई आपात्ति(बाढ़, भूक्म्प आदि) घटित हो जाये जिसके कारण आपके शहर की नेट तथा विधुत सेवा ठप हो जाये और ठीक होने मेँ दस दिन लग जायेगा उस समय मेँ आपको डाक या संदेश भेज ने के लिए पोस्टमेन की आवशयकता होगी।
इस लिए जितनी उपयोगी ई-मेल हैं उससे ज्यादा उपयोगी सामान्य-मेल हैं।
हम जितना महत्व ईन्टरनेट को देते है उतना ही महत्व पोस्टमेन को देना चाहिए।
"मेरी कलम से"
रामस्वरूप दिवराया
सही कहॉ
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