जब भी मुसिबत आती, आते है पापा जी याद....

/ लेखक- रामस्वरूप दिवराया

जब भी आती है कोई मुसिबत करते है अक्सर माँ को याद
लेकिन आती जब मुसिबत बङी आते है पापा जी याद
कहते है लौग सभी
बदल जाती हैँ
स्त्रिया शादी के बाद,
बदल जाते पुरुष सचमुच बिटिया के जन्म के बाद,
जो खोजता तरक हर बात पर ,
घुटना टेक देता
प्यारी सी बिटीया की मुस्कान पर,
दिन भर रहता है
काम मेँ सक्रिय,
फिर भी देता बिटिया की
हर हरकत पर प्रतिक्रिय
सुना होगा आपने कि मर्द रोया नहीँ करते
लेकिन बिठाकर बिटिया को विदाई की डोली मेँ पल्के भिगोयो करते,
कल का कङक पिता अब बदल गया,
क्योकिँ अब जमाना बदल गया॥ पिछली पोस्ट देखे ई - मेल और सामान्य मेल अपनी कहानी , कविता और लेख यहाँ प्रकाशित करवाने के लिए rsdiwraya@gmail.com पर सम्पर्क करे।

10 comments:

  1. waah ..bahut sundar ..sacchai ke sath ..

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  2. Dr.NISHA MAHARANA आपने बहुत ठिक कहाँ अपनी राय देने के लिए आभार

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  3. समय के साथ बदलाव का आना लाजिमी है ..
    बहुत सुन्दर

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  4. कविता जी आपने ठीक कहा परिवर्तन ही जीवन है।
    धन्यवाद।

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  5. टंकण में गलतियाँ सुधारिये जैसी मुसीबत।

    बहुत अच्छा लिखा है ।

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  6. शब्दों के हेर फेर से और ज्यादा प्रभावशाली लिखा जा सकता है.

    भविष्य के लिए शुभकामनायें

    मेरे ब्लॉग पर आप आमंत्रित  हैं :)

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  7. धन्यवाद आप यहाँ पधारै
    यह मेरा पहला प्रयास हैँ । इस लिए गलतिया तो होगी जब तक आपका साथ इसी प्रकार रहगा तो अबकी बार अच्छा लिखने की कोशिश करूगाँ।

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  8. अभिव्यक्ति शानदार है .... उम्दा रचना

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  9. धन्यवाद आप पधारैँ

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