Goriya "गौरैया"

एक-दो दशक पहले हमारे घर-आंगन में फुदकने वाली गौरैया आज विलुप्ति के कगार पर है। इस नन्हें से परिंदे को बचाने के लिए हम पिछले तीन सालों से प्रत्येक20 मार्चको"विश्व गौरैया दिवस"के रूप में मनाते आ रहे हैं, ताकि लोग इस नन्हीं सी चिड़िया के संरक्षण के प्रति जागरूक हो सके। यह दिवस पहली बार वर्ष2010में मनाया गया था। भारत में गौरैया की संख्या घटती ही जा रही है। कुछ वर्षों पहले आसानी से दिख जाने वाला यह पक्षी अब तेज़ी से विलुप्त हो रहा है। दिल्ली में तो गौरैया इस कदर दुर्लभ हो गई है कि ढूंढे से भी ये पक्षी नहीं मिलता है इसलिए पिछले वर्ष2012में दिल्ली सरकार ने इसेराज्य-पक्षीघोषित कर दिया है।
वैसे गौरैया के इस हालत के जिम्मेदार हम मानव ही है। हमने तरक्की तो बहुत की लेकिन इस नन्हें पक्षी की तरक्की की तरफ कभी ध्यान नहीं दिया। यही कारण है कि जो दिवस हमें ख़ुशी के रूप में मनाना चाहिए था वो हम आज इस दुःख में मनाते है कि इनका अस्तित्व बचा रहे। सिर्फ़ एक दिन नहीं हमें हर दिन जतन करना होगा गौरैया को बचाने के लिए। गौरैया महज एक पक्षी नहीं है, ये तो हमारे जीवन का अभिन्न अंग भी रहा है। बस इनके लिए हमें थोड़ी मेहनत रोज करनी होगी छत पर किसी खुली छावदार जगह पर कटोरी या किसी मिट्टी के बर्तन में इनके लिए चावल और पीने के लिए साफ़ से बर्तन में पानी रखना होगा। फिर देखिये रूठा दोस्त कैसे वापस आता है। :)
भारतीय डाक विभागद्वारा9 जुलाई, 2010को गौरैया पर जारी किये गए डाक टिकट का चित्र :-http://rsdiwraya.blogspot.in/2013_10_01_archive.html

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